सांस्कृतिक पत्रिका: articals | GSSS BARAGAON SHIMLA HP
articals लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
articals लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

Smart Classes



विद्यालय में स्‍मार्ट कक्षाओं में अध्‍यापक और विद्यार्थी नवीनतम जानकारी प्राप्‍त करते हुए। इस प्रकार के अध्‍यापन पर विद्याथियों ने प्रसन्‍नता जाहिर की। 





राष्‍ट्रीय सेवा योजना शिविर सम्पन


राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बड़ागांव जिला शिमला में राष्‍ट्रीय सेवा योजना दिवस का सात दिवसीय शिविर आज सम्पन हो गया ! समापन समारोह की अध्यक्षता ग्राम पंचायत बड़ागांव के प्रधान पूर्ण कष्यप ने की ! इस अवसर पर शिक्षा समिति की अध्यक्षा राधा देवी भी उपस्थित थी! इन सात दिनों में  स्वयं सेवियों विद्यालय परिसर और बाहरी क्षेत्र की साफ सफाई की तथा कुरुतियों कें विरुद्ध जनजागरण किया । इस शिविर में 50 छात्र छात्राओं ने भाग लिया! इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने इस प्रकार के शिविरों की प्रासंगकिता पर प्रकाश डाला ! शिक्षा समिति की अध्यक्षा ने विद्यार्थियों से अध्ययन पर अधिक ध्‍यान देने पर बल दिया। पाठशाला में सेवा योजना प्रभारी प्रदीप शर्मा ने राष्‍ट्रीय एकता के लिए सेवा योजना के महत्व पर प्रकाश डाला तथा युवाओं को समाज सेवा के प्रति जागरुक किया ! उन्होने बताया कि डा0 मुकुद  देवराज मैहता और प्राचार्य रोशन जसवाल ने विद्यार्थियों को विभिन्न विषयो की जानकारी दी  इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

राष्‍ट्रीय सेवा योजना शिविर सम्पन


राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बड़ागांव जिला शिमला में राष्‍ट्रीय सेवा योजना दिवस का सात दिवसीय शिविर आज सम्पन हो गया ! समापन समारोह की अध्यक्षता ग्राम पंचायत बड़ागांव के प्रधान पूर्ण कष्यप ने की ! इस अवसर पर शिक्षा समिति की अध्यक्षा राधा देवी भी उपस्थित थी! इन सात दिनों में  स्वयं सेवियों विद्यालय परिसर और बाहरी क्षेत्र की साफ सफाई की तथा कुरुतियों कें विरुद्ध जनजागरण किया । इस शिविर में 50 छात्र छात्राओं ने भाग लिया! इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने इस प्रकार के शिविरों की प्रासंगकिता पर प्रकाश डाला ! शिक्षा समिति की अध्यक्षा ने विद्यार्थियों से अध्ययन पर अधिक ध्‍यान देने पर बल दिया। पाठशाला में सेवा योजना प्रभारी प्रदीप शर्मा ने राष्‍ट्रीय एकता के लिए सेवा योजना के महत्व पर प्रकाश डाला तथा युवाओं को समाज सेवा के प्रति जागरुक किया ! उन्होने बताया कि डा0 मुकुद  देवराज मैहता और प्राचार्य रोशन जसवाल ने विद्यार्थियों को विभिन्न विषयो की जानकारी दी  इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

राष्‍ट्रीय सेवा योजना शिविर आरम्भ

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बड़ागांव जिला शिमला में राष्‍ट्रीय सेवा योजना दिवस का सात दिवसीय शिविर आज आरम्भ हो गया ! शिविर का उदघाटन सेवानिव्त अध्यापक और पूर्व गा्रम पंचायत प्रधान जवाहर शर्मा ने किया ! इस अवसर पर शिक्षा समिति की अध्यक्षा राधा देवी भी उपस्थित थी! इन सात दिनों में  स्वयं सेवियों  विद्यालय परिसर और बाहरी क्षेत्र की साफ सफाई का आयोजन करेंगे तथा कुरुतियों कें विरुद्ध जनजागरण करेगे! । इस शिविर में 50 छात्र/ छात्रायें भाग ले रही है! इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने इस प्रकार के शिविरों की प्रासंगकिता पर प्रकाश डाला ! शिक्षा समिति की अध्यक्षा ने विद्यार्थियों से अध्ययन पर अधिक ध्याान देने पर बल दिया! प्राचार्य रौशन जसवाल ने राष्‍ट्रीय एकता के लिए सेवा योजना के महत्व पर प्रकाश डाला तथा युवाओं को समाज सेवा के प्रति जागरुक किया । पाठशाला में सेवा योजना प्रभारी प्रदीप शर्मा ने कहा कि विद्यालय में इन गतिविधियों में तेजी आई है और छात्रों में इसके प्रति काफी जोश है । मुख्य अतिथि ने इस अवसर पर विद्यालय को 2 हजार रुपये देने की घोषणा की!




राष्‍ट्रीय सेवा योजना शिविर आरम्भ

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बड़ागांव जिला शिमला में राष्‍ट्रीय सेवा योजना दिवस का सात दिवसीय शिविर आज आरम्भ हो गया ! शिविर का उदघाटन सेवानिव्त अध्यापक और पूर्व गा्रम पंचायत प्रधान जवाहर शर्मा ने किया ! इस अवसर पर शिक्षा समिति की अध्यक्षा राधा देवी भी उपस्थित थी! इन सात दिनों में  स्वयं सेवियों  विद्यालय परिसर और बाहरी क्षेत्र की साफ सफाई का आयोजन करेंगे तथा कुरुतियों कें विरुद्ध जनजागरण करेगे! । इस शिविर में 50 छात्र/ छात्रायें भाग ले रही है! इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने इस प्रकार के शिविरों की प्रासंगकिता पर प्रकाश डाला ! शिक्षा समिति की अध्यक्षा ने विद्यार्थियों से अध्ययन पर अधिक ध्याान देने पर बल दिया! प्राचार्य रौशन जसवाल ने राष्‍ट्रीय एकता के लिए सेवा योजना के महत्व पर प्रकाश डाला तथा युवाओं को समाज सेवा के प्रति जागरुक किया । पाठशाला में सेवा योजना प्रभारी प्रदीप शर्मा ने कहा कि विद्यालय में इन गतिविधियों में तेजी आई है और छात्रों में इसके प्रति काफी जोश है । मुख्य अतिथि ने इस अवसर पर विद्यालय को 2 हजार रुपये देने की घोषणा की!




श्री नित्‍य दत सेवानिवृत

पाठशाला के लिपिक श्री नित्‍य दत शर्मा 38 साल 17 दिन के सेवाकाल के बाद आज सेवानिवृत हो गए । श्री शर्मा ने 1972 में एन सी सी में लास्‍कर के पद से अपना कार्य आरम्‍भ किया। श्री शर्मा को पाठशाला के स्‍टाफ ने शानदार विदाई दी। श्री नित्‍य दत शर्मा ने सपरिवार इस आयोजन में शिरक्‍त की।

श्री चन्‍द्र शेखर शर्मा सेवानिवृत

पाठशाला के प्रशिक्षित स्नताक अध्यापक श्री चन्द्र शेखर शर्मा 37 वर्षों की सेवा के बाद 30 अप्रेल 2010 को सेवानिवृत हुए! उन्होने बड़ागांव स्कूल में 20 वर्षों तक सेवा की! पाठशाला के अध्यापकों और बच्चों ने उन्हे शानदार विदाई दी!

हिमाचल के स्कूलों में विद्यार्थियों की स्कूल छोड़ने की दर

हिमाचल के स्कूलों में विद्यार्थियों की स्कूल छोड़ने की दर अन्य राज्यों की अपेक्षा सबसे कम है। राज्यों में ऐलीमेंटरी एजूकेशन की समीक्षा के लिए गठित टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है। कम ड्राप आउट की दर में प्रदेश को पहला स्थान मिला है।
साक्षरता दर के मामले में पहले स्थान पर रहने वाले केरल राज्य को भी ड्राप आउट रेट के मामले में दूसरा स्थान मिला है। उत्तराखंड की इस मामले स्थिति बेहतर हुई है और वह तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यूनाइटेड नेशन डवलपमेंट प्रोगाम और प्लानिंग कमीशन के लगभग एक दर्जन विशेषज्ञों के माध्यम से यह रिपोर्ट तैयार की है।
ड्राप आउट रेट की दर देखी जाए तो हिमाचल में प्राइमरी स्तर पर यह 2.05 फीसदी है। शिक्षा विभाग के ताजा सर्वे के अनुसार राज्य के चार जिलों ने ड्राप आउट रेट को शून्य फीसदी लाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इन जिलों में लाहौल स्पीति, हमीरपुर, बिलासपुर और सोलन जिला शामिल हैं। इन सभी जिलों में पहली से पांचवी कक्षा तक कोई भी छात्र पढ़ाई छोड़ कर नहीं गया है।
पूरे प्रदेश के स्कूलों पर कराए गए सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में पहली कक्षा में कुल 92,025 बच्चों ने प्रवेश लिया था। इनमें 90,133 ने पांचवी कक्षा तक पढ़ाई पूरी की । इन बच्चों में से केवल 1892 छात्र ही पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए।

हिमाचल प्रदेश स्कूलों में जर्मन भाषा

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड जर्मन सरकार के मैक्समूलर भवन और गैर सरकारी संस्था गोथे इंस्टीटयूट के सहयोग से प्रदेश के चुनिंदा स्कूलों में जर्मन भाषा का वैकल्पिक कोर्स शुरू करेगा।20 से 27 जून तक जर्मन यात्रा से लौटे प्रदेश शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. सीएल गुप्त ने बताया कि जर्मन की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विस्तारीकरण के मद्देनजर जर्मन भाषा के ज्ञाताओं की कमी को दूर करने के लिए जर्मन सरकार ने विश्व भर में एक हजार पार्टनर स्कूल खोलने का निर्णय लिया है।जर्मन सरकार के इस निर्णय के तहत संचालित किए जाने वाले पार्टनर स्कूलों में जहां अध्यापकों का प्रशिक्षण और सिलेबस जर्मन सरकार की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा, वहीं आधारभूत ढांचा मुहैया कराने की जिम्मेदारी संबंधित शिक्षा बोर्डो की होगी। देश में दिल्ली, बेंगलुरु और गुजरात के शिक्षा बोर्डो ने कोर्स शुरू कर दिए हैं। प्रदेश विश्विद्यालय में जर्मन भाषा के कोर्स चल रहे हैं।

शहीद सतीश वर्मा


बडागांव के सतीश वर्मा ने एक छोटी से आयु में स्थानीय विद्यालय और अन्य युवाओं को राष्ट्र सेवा का सन्देश दिया ! 21 अप्रेल 1972 को पिता करम चंद और माता अमलू देवी के घर जन्मे सतीश वर्मा ने राजकीय वरिष्ठ माद्यमिक पाठशाला बडागांव से मार्च 1988 में दसवी की परीक्षा पास की और द्वितीय बटालियन डोगरा रेजिमेंट में भारती हुए ! साहसिक कामों के परिणाम स्वरुप सतीश वर्मा को अनेक प्रन्संसा पात्र दिए गए ! 1991 से 93 में इन्होने जालंधर के सी ऐ आपरेशन के दौरान काकड़ सेक्टर में दुश्मनों का जम कर सामना किया और कारगिल की ऊँची चोटी ओ पी हिल पर कब्जा करने के दौरान सुरक्षा में महत्वपूरण भूमिका निभाई ! ओपरेशन के समय वे राजस्थान में तेनात थे ! इसके बाद जून 2001 में इन्हें मश्कोह घाटी कारगिल भेजा गया जहाँ सतीश वर्मा को सिपाही से लांस नायक की पदौनती दी गई ! 11 जुलाई 2001 को द्वितीय बटालियन डोगरा रेजिमेंट के सी आई ओपरेशन के समय गुरेज सेक्टर के ब्रोब गाँव में पेट्रोलिंग लाइन पर चोकसी के दौरान दुश्मनों से मुठभेड़ हुई ! इसमें सतीश वर्मा ने तीन दुश्मनों को ढेर किया ! और स्वयं भी मातृभूमि पकी रक्षा करते हुए शहीद हो गए ! 15 जुलाई 2001 को शहीद सतीश वर्मा का अंतिम संस्कार राजकीय वरिषीथ माद्यमिक पाठशाला बडागांव के मैदान में किया गया ! गाँव के लोगों सतीश वर्मा के सहपाठियों परिवारजनों और 1832 एलटी रेजिमेंट के कमांड ऑफिसर ऐ के मोरे सहित मेजर जे सी ओ तथा सेना के जवानों रामपुर बुशेहर के एस डी एम अरविन्द शुक्ला डी एस पी रामपुर बुशेहर सहित अनेक लोगो ने शहीद सतीश वर्मा को श्रधासुमन अर्पित किये ! पाठशाला परिसर में शहीद सतीश की प्रतिमा विद्यालय के छात्रों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती है !

आभार ब्लोग्वानी

पाठशाला का ब्लॉग सांगरी दर्पण अब ब्लोग्वानी पर भी देखा जा सकेगा ! सांगरी दर्पण को ब्लोग्वानी ने लिंक उपलब्ध करवाया है ! इसके लिए पाठशाला परिवार ब्लोग्वानी का आभार व्यक्त करता है ! इस माध्यम से पाठशाला के विद्यार्थियों की रचनाएँ ब्लोग्वानी पर देखी जा सकेगी जिससे बच्चों को प्रोत्साहन मिलेगा ! और पाठक पाठशाला की गतिविधियों से परिचित हो सकेगे ! ब्लोग्वानी को पुनः धन्यवाद उनके इस सहयोग से हमें वास्तव में प्रोत्साहन मिला है !
रोशन जसवाल
प्राचार्य

नितिन

हिमाचल प्रदेश से सटे उत्तराखंड राज्य में स्थित हनोल नामक छोटे से गाँव के बारे में बताता हूँ। यह गाँव रोहड़ू से करीबन दो घंटे की दूरी पर है। रोहड़ू से आप सावड़ा (सरस्वती नगर) अथवा हाटकोटी होते हुए कुड्डू पर हिमाचल प्रदेश की सीमा पार करके उत्तराखंड राज्य में प्रवेश करते हैं। समरकोट होते हुए आप त्यूणी पहुँचते हैं। त्यूणी से तौंस नदी पार करके इस राज्य के उत्तरकाशी जिले में प्रवेश करते हैं। यह एक मनमोहक यात्रा है। रोहडू से त्यूणी तक पब्बर नदी का नज़ारा बड़ा ही रमणीय है। रास्ते में पब्बर नदी तौंस में मिल जाती है। हालाँकि यह मार्ग बीच बीच मैं ऊबड़ खाबड़ भी है। त्यूणी से पैंतालीस मिनट की दूरी पर हनोल स्थित है।

त्यूणी से आगे कई छोटे छोटे गाँव हैं और यहाँ का नज़ारा भी देखते ही बनता है। दूर बहती रूपन और सूपन नदियाँ एक अलग ही छटा भिकेरती हैं। हनोल, महासू देवता के मन्दिर के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध है। पहले जिला शिमला, सोलन और सिरमौर को महासू के नाम से जाना जाता था। बाद में राज्यों के बँटवारे के बाद यह क्षेत्र पहले उत्तर प्रदेश और अब उत्तरांचल राज्य का हिस्सा बन गया।

महासू देवता का मन्दिर बिल्कुल पहाड़ी शैली में बना है। मुख्य सड़क से नीचे उतर कर आप महासू मन्दिर के आँगन में प्रवेश करते हैं। इस मन्दिर की वास्तु कला देखते ही बनती है। मुख्य मन्दिर में महिलायों का प्रवेश वर्जित है। देवता जी के दर्शन के लिए कपाट खुलवाने पड़ते हैं। लोग दूर दूर से अपनी मन्नत मांगने यहाँ आते हैं। जैसा की पहाड़ों में प्रथा है मन्नत पूरी होने पर देवता जी को बकरे की बलि देनी होती है। अब यहाँ हालाँकि जिन्दा बलि नहीं दी जाती है। महासू देवता की मान्यता केवल उत्तराखंड में ही नहीं, अपीतु हिमाचल में भी है।

हनोल में २-३ सिक्के के काफी भारी गोले हैं, जो कि दोनों हाथों में उंगलियाँ फसा कर ही उठाये जा सकते हैं। वे अहम् का प्रतीक हैं। अगर आप अपने अहम् को काबू में रखें और सूझ भूझ से इन गोलों को उठा सकते हैं। आप इन गोलों को तस्वीर में भी देख सकते हैं।

यहाँ आने के लिए आपको शिमला से पहले रोहड़ू अथवा हाटकोटी आना पड़ेगा। रात यहाँ रुकने के बाद, आप सुबह हनोल के लिए सीधी बस ले सकते हैं। दोपहर में यही बस वापस रोहड़ू आती है। यदि आप हनोल रात रुकना चाहते हैं तो शिमला से सुबह नौ बजे शांकरी के लिए बस पकड़िये। यह बस शाम पाँच बजे हनोल पहुँचती है।

यहाँ पर ठहरने का भी उचित प्रबंध है। गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा संचालित एक यात्री निवास यहाँ उपलब्ध है। अथवा, यहाँ पर छोटे छोटे ढाबे भी बिस्तर रखते हैं और आप किराये पर इन ढाबों में भी रात बिता सकते हैं। परन्तु काफी लोग, देवता के मन्दिर में रात लगाने आते हैं, और मन्दिर के पराँगण में ही रात बिताते हैं। अगर आपकी भी ऐसी कोई इच्छा हो तो, अपने साथ कम्बल व चादर ले जाना न भूलें।

इस जगह पर अभी मोबाइल फ़ोन की घंटी बजनी शुरू नहीं हुई है। इसलिए भी यह जगह आप को सुकून के पल दे सकती है।

वापसी में आप त्यूणी से लाल चावल की खरीदारी कर सकते हैं। अपने लाल रंग की विशेषता लिये, रूपन नदी से सींचे, यह चावल आप को शायद ही कहीं और मिलें। यह स्वास्थ्य के हिसाब से भी अत्यन्त गुणकारी हैं। धान की नई फसल नवम्बर में आती है। वैसे भी चावल जितना पुराना हो उतना अच्छा रहता है।

यह पूरा क्षेत्र अभी भी शहरों की अपेक्षा दस साल पीछे का जीवन जी रहा है। यदि आप कोई मन्नत मांगना चाहते हैं या फिर कुछ दिन शहरी जीवन से नाता तोड़ कर प्रकृति के कुछ अनछुये नजारों का आनंद लेना चाहते हैं तो यहाँ जरूर आयें।

www.himvani.com



ब्लोग्स


जियों जियों समय बितता जा रहा है विज्ञानं निरंतर विकास करता जा रहा है ! अब अपने विचारों को व्यक्त करने का माध्यम ब्लोग्स बनातें जा रहे है लोग बाग़ अपने अपने ब्लोग्स में अपने सुंदर विचार व्यक्त करते जा रहे है ! हर तरफ आम और ख़ास के ब्लॉग है ! अब जरुरत है मात्र समय देने की ! ब्लॉग विचारों के अदान प्रदान का एक सशक्त माध्यम बनता जा रहा है ! गूगल हो या रेडिफ या फिर बिग अड्डा अनेकों द्वार है ब्लॉग बनाने के ! आवश्यकता है की आपकी सोच कितनी सृजनात्मक है! सच हम पेन से की बोर्ड की यात्रा कर रहें है और सफ़र अभी और लम्बा है !


ब्लोग्स

लगभग छ महीने पहले प्रयोग के रूप में शुरू किये गए पाठशाला के ब्लॉग को आगे बढाते समय बहुत से ब्लोग्स को देखने का मोका मिला तो पाया की ब्लॉग पर बहुत काम रहा है ! इस दोरान हिंदी और अंग्रेजी ब्लोग्स को देखने का मोका मिला और ढेर सारी जानकारी प्राप्त की ! ब्लोग्स के माध्यम से हम गतिविधियों से जुड़े तो रहते ही है साथ ही ढेरों सारी जानकारी भी मिलती है !इस माध्यम से विचारो का आदान प्रदान भी संभव हो पता है !
ब्लॉग बनाने की प्रेरणा मुझे हि० प्र० लेक्चर्स संघ के ब्लॉग www.hpsla.blogspot.com से मिली और हमने पाठशाला का ब्लॉग बना कर एक प्रयोग किया ! हम अपने पाठको से आग्रह करते है की ब्लॉग देखते हुए अपना सुझाव दें !कमेन्ट पर क्लिक करे और लिख दीजिये दो चार शब्द सुझाव और प्रेरणा के !

INTERNET

आज सुचना तन्त्र में इतना विकास हो गया है की मनुष्य इन्टरनेट के माध्यम से समीप आ गया है ! अंग्रेजी के अलावा देश की दूसरी भाषाओँ में भी अपने विचार व्यक्त किये जा सकतें है ! आवश्यकता है इमानदारी से प्रयास करने की ! इन्टरनेट के माध्यम से अपने बोधिक स्तर में भी विकास किया जा सकता है ! हिंदी ब्लोग्स में इतना कार्य हो रहा है की वो सब जानकारी हमारी अभिरुचि को निखार सकती है ! जब इतना सब है तो क्या हम हिंदी के उत्थान के लिए दो कदम आगे नहीं बड़ा सकते ?

SUCCESS

There is hardly anyone in this world who would not like to succeed. People in business want expansion, people in job want promotion. Some want to succeed for fame& some for happiness but a very little number of persons succeed in the way they wish to. Here are some mantras to success through which one can get success in his life:
A person can get success only if he dreams because dreams work as a goal in life and when we have goal only then we can put effort for it, to make it true. The way to succeed to become bigger than you presently are is to dream big. Whether you think you can, or you can not, you are right. So big dreams are necessary for success.
Beginning is the most important part of the work:-No one can get success only by dreaming but one has to also start work to make his dream true. Opportunities exists, but it has to find you working. As is said,” Every Financial genius is not Bill Gates but is someone who manages to earn more than his family can spend”. So it is not required to start with a big project only, begin with simple project also because a initial simple project will be a big project one day.
If You are a strong Believer in Luck, You will find the harder you work, the luckier you get:- Luck is itself is not a path to success but if you work 7 days a week, 14 hours a day you will get lucky. “No Great things were ever done without great labour” -----Swami Vivekanand. So it should be kept in mind that luck starts only when you work hard.
Learning Commitment & Passion leads to success:- To achieve a goal, no doubt hard work is important but work & efforts in the right direction under proper guidance are most important. Man at the top is usually someone who has been in habit of going to the bottom of things. So continuous habit of learning with passion makes your success easy.
Two People can work on a problem better than one:- Most of us are individually great performers but we must not forget the power of teamwork. So to find success in your desired way you should work in a team.
Example is better than precept:- A successful person is one who can take work from other. To get people around you to work as per your requirement, you always need to set examples before issuing orders.
Small Opportunities are often the source of great beginning:- Opportunities, however big or small, should never be left untapped; As goes the saying “Strike the Iron while it is Hot”. Right decision at the right time is very important.
Rome was not built in a day:- Patience is the virtue of success. Success is a gradual process and requires constant efforts over a period of time. Delay in success should never be taken as failure. Failure is an integral part of Success:-As goes the saying,” It is no use crying over split milk”. Failure should always be taken as a step forward towards success and not a setback. “Your Most unhappy customers are your greatest source of learning” –Bill Gates
Get Happiness out of your work or you may never know what happiness is:-Always enjoy doing whatever work you have in hand. Work viewed as a burden or liability leads to unhappiness in life.
Also keep in mind that due to work pressure your personal life should not adversely affected.
Many a Little makes a mickle:-Yesterday is gone & future is unknown. It is only today you have control on. So planning in the present for future through savings, insurance & Investments etc will pave the way for your success and ensure you a peaceful and prosperous life.
High Winds blow on high hills:-The higher you go the toughest it gets. You should always be prepared to face competitors and their tactics. Normally, after succeeding, personal rivalry and ego become the major reason for pulling you towards downfall. Your companions in the journey of your success should also be your friends even when you reach the top. The biggest enemy of future success is past success.
Continuous efforts are required to maintain the position at the top.
“Success is a journey, not a destination”

Photos


सन १९६४ मे

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बड़ागाव के उदघाटन अवसर पर स्व यशवंत सिंह परमार !

HAPPY HOLI


रंगों के पावन त्यौहार पर सभी को मंगल्कामनाये

MAA BHIMAKALI TEMPLE : A FAMOUS PILGRIMAGE




Maa Bhima Kali temple in Rampur Bushehar is one of the famous temples among a number of pilgrimages in Himachal Pradesh .People from neighboring states as well as Himachalies have great faith in Maa Bhima Kali ,who is the deity of the dynasty of Rampur Bushehar .
There is a myth behind the establishment of the goddess in Sarahan area .It is said that Vanasur was the eldest among a hundred sons of king Bali ,the great grantson of king Prahlad .The main Gods and Goddesses of Kinnaur are considered the offspring of Vanasur and Goddess Hidimba.
In the war which took place after the famous Usha-Anirudh love legend, Lord Shiva took the side of Vansur ,and had to face Lord Krishna. After the war , Pradyuman ,son of Lord Krishna, reigned over the kingdom . Since then people of the area have been following the traditions and customs of the pradyuman-Anirudha dynasty. This famous dynasty built the temple of Maa Bhima K ali inside the palace .On the temple premises, there are three courtyards, and at the top courtyard, two five storey buildings of BhimaKali are made in sculpted wood.
On the top storey of the new building, an idol of BhimaKali is situated. And at the lower storey, aspects of the goddesses Sita and Parvati,also known as Himalayan daughter married to Lord Shiva , are situated. On the temple premises there are temples of Lord Raghunath, Narsingha and Lakdaveera. . People visit this place from distant areas , especially during Navraatras.
Routes:-
Situated at about 170 km from shimla, the temple is located at a height of 2150 mtrs. Good lodging facilities are available form tourists, whith an in located near the temple . There are also to private houses where devotees from distant places can stay. One can reach BhimaKali Temple via Theog , Kumarsain Narkanda ,Rampur or Jeori

HISTORY OF BARAGAON


बड़ागाव का गूगल अर्थ से लिया गया चित्र !
बड़ागाव का एतिहासिक महत्त्व है !सांगरी रियासत के नाम से प्रसिद्ध यह क्षेत्र भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आदोलन से जुड़ा रहा है ! जनवरी १९४६ मे स्थापित हिमालयन हिल स्टेट रीजनल कोंसिल की शिमला मे १० जून १९४७ को बैठक मे मतभेद हो गए थे ! ६ सदस्यों ने अपना एक अलग संगठन बनाया जिसका नाम हिमालयन हिल स्टेट सब कोंसिल रखा गया ! जुलाई १९४७ में सांगरी रियासत में चिरंजी लाल वर्मा ने प्रजामंडल की स्थापना की जिसमे नर सिंह दास उत्तम राम मेहता परमा नन्द ठाकुर केवल राम और गाव बरेरी बड़ागाव शिवान बनाहर कांगल कोटिघात और सांगरी के अनेक आन्दोलनकारी शामिल हुए ! १ अगस्त १९४७ को चिरंजी लाल वर्मा की अध्यक्षता मे अस्थाई सरकार लोक राज्य सरकार की स्थापनां हुई ! चिरंजी लाल वर्मा ने शिमला से नोकरी छोड़ कर स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लिया था ! २१ दिसम्बर १९४७ को सांगरी रियासत की राजधानी बड़ागाव मे समेलन हुआ ! इस समेलन मे पहाडी रियासतों को मिला कर एक पहाडी प्रान्त बनाने की मांग रखी गई ! ८ मार्च १९४८ को शिमला हिल्स की २७ पहाडी रियासतों के विलय से हिमाचल प्रदेश के गठन की प्रक्रिया आरम्भ हुई थी ! हिमालयन हिल स्टेट सब रीजनल कोंसिल परमार पदमदेव धडा ने हिमालयन प्रान्त का नाम सुझाया था !
 
RSS Feed । Mobile Version । Advertise । Business Solutions । ToS । Privacy Policy । Copyright । Contact © SANGRIDARPAN
[ ENRICHED BY : ADHARSHILA ] [ I ♥ BLOGGER ]